इन १० वजहों से हो सकती है पीरियड्स आने में देरी

कभी कभी पीरियड्स लेट क्यों आता है?, पीरियड लेट हो तो क्या करे?, पीरियड क्यों रुक जाते हैं?, पीरियड आने के लक्षण क्या होते हैं?

पीरियड्स जिसे हिंदी में महावारी या मासिक धर्म कहते है। यह महिलाओं के शरीर में हर महीने होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके जरिए उनके शरीर का गंदा खून और toxins बाहर निकलते है। महिलाओं के संपूर्ण शारीरिक विकास के लिए हर महीने पीरियड्स आना बहुत जरूरी है।

हर महिला को पीरियड्स महीने में एक बार आते है और 4 से 7 दिन तक रहते है। यह सामान्य तौर पर 28 से 35 दिनों की साइकिल है मतलब कुछ लड़कियों को 28 दिनों में पीरियड्स दोबारा आ जाते है, जो कि सामान्य है और कुछ लड़कियों के पीरियड्स 35 दिनों में आते है जोकि लेट पीरियड्स माने जाते है।

पीरियड्स हर महिला के लिए एक नियमित मासिक प्रक्रिया है जो एक निश्चित समय पर रिपीट होती है जैसे किसी महिला को अगर महीने की 5 तारीख को पीरियड्स आए है तो अगले महीने भी 3 से 5 तारीख के बीच में पीरियड्स आ जाने चाहिए। पीरियड्स का समय से पहले आना अच्छा माना जाता है और पीरियड का लेट आना चिंता का विषय है।

पीरियड्स लेट आने के सामान्य कारण

१) तनाव

२) प्री मेनोपॉज

३) थायराइड (थायरॉइड के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए लेख के अंत में दी हुई दूसरे लेख की लिंक पर क्लिक करें और पढ़े।)

४) ब्रेस्ट फीडिंग

५) बर्थ-कंट्रोल पिल्स

६) वजन घटना या बढ़ना

७) अल्कोहल और स्मोकिंग

८) बड़ी बीमारी और हैवी स्टेरॉइड्स

९) पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)

१०) अनियमित व अस्त-व्यस्त जीवनशैली

१) तनाव

पीरियड्स लेट आने का एक मुख्य कारण तनाव है। यदि आप किसी विषय में चिंतित है या किसी विषय के बारे में बहुत ज्यादा ही सोचते है तो यह आपकी शरीर की हर एक क्रिया पर बुरा असर डालता है इसमें पीरियड्स लेट आना भी शामिल है। आपके बहुत ज्यादा टेंशन में रहने के कारण आपके पीरियड्स लेट हो सकते है।

२) प्री मेनोपॉज

मेनोपॉज का मतलब है पीरियड्स का धीरे-धीरे बंद होना। आमतौर पर सब महिलाओं में 45 की उम्र के बाद मेनोपॉज होता है। मेनोपॉज से पहले महिलाओं के शरीर में कई आंतरिक बदलाव होते है जिससे उनके पीरियड्स लेट आने लगते है।

३) थायराइड

यह महिलाओं में पाई जाने वाली एक आम बीमारी है। यदि कोई महिला थायराइड की समस्या से पीड़ित है और उसका थायराइड अचानक घटने बढ़ने लगता है तो इसका असर भी उस महिला की पीरियड्स साइकल पर पड़ता है। कहते है ना, एक बीमारी अपने साथ 100 बीमारियां लेकर आती है। तो थायराइड के कारण भी महिलाओं के पीरियड्स लेट हो सकते है।

४) ब्रेस्ट फीडिंग

महिलाओं द्वारा अपने शिशु को स्तन पान कराते समय भी उनके पीरियड्स लेट हो सकते है।

५) बर्थ-कंट्रोल पिल्स

बर्थ-कंट्रोल पिल्स पीरियड साइकिल पर बुरा असर डालती है। बर्थ-कंट्रोल पिल्स को लेने से कुछ महिलाओं के पीरियड्स समय से पहले आने लगते है। कुछ महिलाओं के पीरियड्स लेट आते है। कुछ महिलाओं के पीरियड्स ज्यादा समय के लिए आने लगते है। जो महिलाएं परिवार नियोजन के लिए बर्थ-कंट्रोल पिल्स लेती है उनकी पीरियड्स साइकल सामान्यतः गड़बड़ा जाती है।

६) वजन घटना या बढ़ना

महिलाओं के वजन घटने या बढ़ने के कारण भी उनके पीरियड्स लेट हो सकते है। अगर किसी महिला का वजन बहुत बढ़ गया है या किसी महिला ने अपना वजन अत्यधिक मात्रा में घटाया है तो इसका सीधा असर उनकी पीरियड्स साइकल पर पड़ता है। हर महिला का उम्र और लंबाई के अनुसार एक परफेक्ट वेट होता है। जरूरत से बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन भी लेट पीरियड्स का एक कारण हो सकता है।

७) अल्कोहल और स्मोकिंग

शराब और सिगरेट का सेवन भी महिलाओं में पीरियड्स लेट आने का एक मुख्य कारण है। सभी जानते है शराब और सिगरेट का सेवन सेहत के लिए हानिकारक है लेकिन आज के माहौल में कोई भी इन चीजों से अछूता नहीं है इसलिए शराब और सिगरेट का सेवन करने से सभी को किसी न किसी शारीरिक समस्या का सामना करना ही पड़ता है। महिलाओं में शराब और सिगरेट के सेवन का दुष्प्रभाव उनके पीरियड्स पर पड़ता है और पीरियड्स लेट हो सकते है।

८) बड़ी बीमारी और हैवी स्टेरॉइड्स

अगर कोई महिला अभी-अभी किसी बड़ी बीमारी से उठी है और उसमें उसके इलाज के लिए हेवी स्टेरॉइड्स लिए है तो भी उसके पीरियड्स लेट हो सकते है।

९) पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOC)

यह एक हार्मोनल समस्या है। इसके कारण महिलाओं में सामान्य की तुलना में ज्यादा हारमोंस बनते है। हारमोंस की इस असंतुलन की वजह से ही पीरियड्स अनियमित हो जाते है। जो महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित है उनमें लेट पीरियड्स की समस्या बहुत ही कॉमन है।

१०) अनियमित व अस्त-व्यस्त जीवन शैली

देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना, व्यायाम ना करना, खान-पान का ध्यान ना रखना, काम की भाग दौड़ में अपने लिए समय ना निकालना, 6-7 घंटे की नींद ना लेना, खुद पर बहुत अधिक प्रेशर रखना आदि आज की व्यस्त जीवन शैली का एक सामान्य हिस्सा है जो हमारे शरीर पर बुरा असर डालते है। महिलाओं की यह अनियमित व अस्त-व्यस्त जीवन शैली उनके पीरियड्स साइकल पर बुरा असर डालती है और उनके पीरियड्स लेट आने लगते है।

पीरियड्स लेट आना आज के समय में महिलाओं में होने वाली एक कॉमन प्रॉब्लम है। आज कई महिलाएं इस समस्या से जूझ रही है। अनियमित या लेट पीरियड्स की वजह से महिलाओं को और भी कई शारीरिक समस्याएं जैसे कमर दर्द, सिर दर्द, पैरों में दर्द, चिड़चिड़ापन आदि घेर लेती है।

अपने खान-पान, जीवन शैली में थोड़े से बदलाव करके हम इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते है। तो नियमित व्यायाम कीजिए, पौष्टिक आहार लीजिए, भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को थोड़ा आराम दीजिए। जो होना है वह होकर ही रहेगा इसलिए व्यर्थ की चिंताएं छोड़ कर खुद को तनाव से दूर रखिए। अगर समस्या ज्यादा है तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लीजिए।

थायरॉइड के घरेलू उपाय पढ़े इस लेख में

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