हर रोज अनुलोम-विलोम करने से आपकी सेहत को मिलते हैं ये १० फायदे

अनुलोम विलोम के फायदे बाबा रामदेव

अनुलोम विलोम: स्वास्थ के लिए फायदेमंद

Anulom vimlom: Benificial for health

प्राणायाम एक लोकप्रिय एवं मशहूर योगासन है, जिसका सम्बन्ध हमारे देश में प्राचीन समय से 5वीं 6वीं शताब्दी से ही है। प्राणायाम के बारे में भगवत गीता में भी पढ़ने को मिलता है। हमारे देश के महान साधु-संतों, ऋषि-मुनियों और योग गुरुओं ने बहुत तपस्या और शोध करके इस विज्ञान का आविष्कार किया है। 

प्राणायाम शब्द संस्कृत भाषा का है जो प्राण और आयाम दो शब्दों से मिलके बना है। जिसमे प्राण का अर्थ है साँस और आयाम से तात्पर्य है लेना और छोड़ना। 

अनुलोम- विलोम को करने से पहले ये जानना जरूरी है कि –

  • अनुलोम-विलोम क्या है?
  • अनुलोम-विलोम के क्या क्या फायदे है?
  • अनुलोम-विलोम को करने का सही तरीका क्या है?

आनुलोम विलोम क्या हैं?

यह एक नाड़ी शोधन प्राणायाम है जिसका अर्थ है साँस के द्वारा शरीर के एनर्जी चैनलों को शुद्ध करना।

अनुलोम विलोम प्राणायाम में तीन शब्द हैं

  • अनुलोम से तात्पर्य है right (सीधा) nostril (नाक का छेद)
  • विलोम से तात्पर्य है left (उल्टा) nostril
  • प्राणायाम का मतलब है साँस लेना और छोड़ना

अर्थात् इस आसन का अर्थ है right और left नाक से सांस लेना और छोड़ना।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से क्या क्या फायदे होते हैं?

१. यह नाड़ी को शुद्ध करता है। नाड़ी चैनल को साफ करता है जिससे oxygen का पूरे शरीर में प्रवाह हो सके। इसीलिए इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम कहते हैं।

२. यह शरीर के poisonous और toxic पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है और हमरी body को Detox करता है ।

३. Skin में निखार और चमक लाता है। 

४. तनाव, थकान, डिप्रेशन को कम करता है। 

५. मन की concentration को बढ़ाता है। 

६. शुद्ध रक्त का flow हमारी body में बढ़ाता है। 

७. Diabetes, heart problems, गठिया, माइग्रेन, कब्ज आदि रोगों के खतरे को कम करता है। 

८. वजन कम करने में सहायक है। 

९. मन को शान्त करके मानसिक क्षमता में वृद्धि करता है। 

१०. आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार है। 

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करते समय कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करते समय कुछ सावधानियों को भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी है 

  • यह प्राणायाम सदैव सुबह ही करना चाहिए। वैसे तो इसे लोग कभी भी कहीं भी कर लेते हैं परन्तु इस आसन को सुबह करने से ज्यादा लाभ मिलता है। 
  • पहली बार इस प्राणायाम को किसी अच्छे yoga instructor के सामने ही करना उचित होगा जिससे आप sure हो सकें कि आप अनुलोम-विलोम के सारे स्टेप सही कर रहें हैं।
  • शान्त मन से और concentration से योगा करना चाहिये।
  • इस योगासन का अधिक फायदा पाने के लिए अपने फूड हैबिट्स का विशेष ध्यान रखना होगा।
  • सबसे जरूरी और अहम् ये है कि गम्भीर हृदय रोगी, गर्भवती महिला और high blood pressure वाले इस प्राणायाम को करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ही लें।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करने क्या तरीका होता है?

अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करने का तरीका 

किसी भी योग से लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरीके से अभ्यास करना अतिआवश्यक है। 

सुबह का समय योगासन के लिये सबसे अच्छा है। 

खुले स्थान में फ्रेश हवा में अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से अधिक लाभ होता है।

किसी साफ जगह पर चादर बिछा कर पद्दासन कि मुद्रा में बैठकर इस योगा को करना सही है।

जो लोग जमीन पर नहीं बैठ सकते हैं वो कुर्सी पर सुखासन की मुद्रा में बैठ सकते हैं।

अपनी कमर को सीधा रखें और दोनों आँख बन्द कर लें। इसके बाद एक गहरी और लम्बी साँस लेके धीरे धीरे छोड़े और अपने मन को focussed करने की कोशिश करें। अब अपनी दाहिनी हाथ के अँगूठे से दाहिनी nostril को बन्द करें तथा बाईं nostril से धीरे धीरे गहरी साँस लें।

अब दाहिनी हाथ के बीच वाली ऊँगली से बाईं nostril को बन्द करें और दाहिनी nostril से अँगूठे को हटाते हुए धीरे धीरे साँस छोड़े।

अब कुछ सेकंड का विश्राम लेके दाई nostril से गहरी साँस लें। इसके बाद दाहिने अँगूठे से दाहिनी nostril को बन्द करें और बाईं nostril से दाहिने हाथ की मध्य ऊँगली को हटा कर धीरे धीरे साँस छोड़े।

इस प्रकार से एक चक्र पूरा होगा।

इस प्रक्रिया को आपको कम से कम 15 मिनट दोहराते जाना है।

 

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निष्कर्ष (Conclusion)

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर को स्वस्थ और दीर्घायु बनाने के लिये नियमित योगा करना अति आवश्यक है। योगा में भी प्राणायाम का सबसे ज्यादा महत्व है। प्राणायाम स्वास्थ्य के लिये अत्यन्त लाभदायक होता है। 

किसी भी तरह की शारीरिक और मानसिक समस्या जैसे टेंशन, टॉक्सिन, अस्वस्थ जीवन शैली की वजह से शरीर की नाड़ी बन्द होने लगती हैं जिसकी वजह से सुस्ती, आलस और थकान अनुभव होता है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम के अभ्यास से बन्द नाड़ियाँ खुलती हैं और दिमाग शान्त और फ्रेश रहता है। इस अभ्यास से शरीर को कोई हानि नहीं पहुँचती है और यह एक सुरक्षित अभ्यास है और इसको छोटे-बड़े सभी लोग कर सकते हैं। 

दोस्तो प्राणायाम तो कई प्रकार के होतें हैं लेकिन अनुलोम-विलोम प्राणायाम का विशेष महत्व है। इसे रेगुलरली करने से खून साफ होता है और खून में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ती है,जिससे कई गम्भीर रोगों के खतरे से बचा जा सकता है।

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