बच्चो को जिम्मेदारी सीखाने के ५ पेरेंटिंग टिप्स

बच्चो को जिम्मेदारी सीखने के ५ पेरेंटिंग टिप्स

अगर भविष्य में बच्चों को देखना चाहते हैं जिम्मेदार तो उनमें शुरू से ही रोपें कुछ खास गुण, आइए जानें क्या-क्या…

बच्चे इस दुनिया की सबसे खूबसूरत तस्वीर हैं और सभी उन्हें बहुत अधिक पसंद करते हैं।
उन पर अपना स्नेह उड़ेलने के लिए आतुर रहते हैं और साथ ही सब यही चाहते हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर जीवन में कामयाब हों व देश के सभ्य तथा जिम्मेदार नागरिक बनें।
आगे चलकर वे भी अपनी भावी पीढ़ी अर्थात् अपने बच्चों को भले संस्कार दें और इस दुनिया के विकास या उन्नति में अपना भरपूर योगदान प्रदान करें।
दुनिया के विकास को सही दिशा दें।
बच्चे प्रत्येक घर का अभिन्न और सबसे महत्वपूर्ण अंग होते हैं।
बच्चों को लेकर हर माता-पिता यही सोचते हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर जिम्मेदार युवक अथवा युवती बनें।
परिवार एवं समाज में उनकी इज्जत या मान-सम्मान को बढाएं।
माता-पिता का यह सोचना बहुत जायज़ है मगर उनका यह सपना बैठे-बैठाए पूरा नहीं हो सकता।
इसके लिए उनको अपने बच्चों में  शुरू से ही कुछ विशेष गुणों का रोपण करना पड़ेगा।
ऐसे ही कुछ गुणों पर हम इस लेख में चर्चा करने जा रहे हैं।
1) आपसी मेलजोल और मिल-बांटने की आदत
बच्चों को शुरू से ही आपस में मिलजुलकर रहने और अपनी चीजों को दूसरों के साथ मिल-बांटने की सीख देनी चाहिए।
इससे बच्चे में उदारता, मिलनसारिता, परोपकारिता और समन्वय के संस्कार पैदा होंगे।
इस तरह वे अपने घर-परिवार, पास-पड़ोस,स्कूल तथा अन्य सामाजिक स्थलों पर सबके साथ मिलजुलकर रहने में आनंद महसूस करेंगे और अपनी चीजों को दूसरों के साथ बांटकर खुश होंगे।
किसी भी चीज़ में  स्वार्थपरता और जिद नहीं दिखाएंगे।इससे वे दूसरों को तो खुश रखेंगे ही साथ ही खुद भी खुश रह पाएंगे।
2) बड़ों का सम्मान और सेवा करने का संस्कार 
बच्चों को हमेशा ऐसी सीख दीजिए कि वे अपने से बड़ों का मान-सम्मान या इज्जत करना सीखें।
इसके साथ ही बड़े-बुजुर्गों की सेवा या सहायता करने की आदत भी उनमें डालें।
ध्यान रहे कि बच्चों में इस प्रकार के संस्कार आप तभी पैदा कर सकते हैं जब आप खुद भी अपने से बड़ों के प्रति ऐसे संस्कार रखते हों।
बच्चों के सामने बड़े-बुजुर्गों की इज्जत करते हों तथा उनकी देखभाल या सेवा-सहायता करते हों।
अगर आप ऐसा नहीं करते और केवल बच्चों को ऐसा करने की सीख देते रहते हैं तो बच्चों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेग अर्थात् बच्चे यह गुण ग्रहण नहीं कर पाएंगे।
3) धैर्य,सहनशीलता व गलती को स्वीकारने का गुण 
जिस व्यक्ति में धैर्य,सहनशीलता और अपनी गलती को स्वीकारने के गुण मौजूद होते हैं वह सबको खुश रखकर जीवन में मनचाही उन्नति करने में समर्थ होता है।
ये ऐसे गुण हैं जो व्यक्ति को एक शानदार इंसान बनाते हैं और साथ ही विभिन्न प्रकार के संकटों अथवा झंझटों से भी बचाकर रखते हैं।
इसीलिए बच्चों में इन गुणों को पैदा करने की ओर खास ध्यान देना चाहिए।
बच्चों में ये गुण खेल खेलते, खाते-पीते और आपस में  बातचीत करने के दौरान आसानी से पैदा किए जा सकते हैं, क्योंकि इस दौरान बच्चे अक्सर इन गुणों का अभाव प्रकट करते हैं।
4) भय,क्रोध,ईर्ष्या और हीन भावनाओं से मुक्ति 
कभी-कभी बच्चों के स्वभाव में कुछ ऐसी कुंठाएं या मानसिक विकृतियां पैदा हो जाती हैं जो उनके भावात्मक पक्ष को कमजोर बना देती हैं।
इनमें मुख्यतः भय,क्रोध, ईर्ष्या, हीनता आदि कुभाव सम्मिलित हैं।
ये ऐसी भावात्मक कमजोरियां हैं जो बच्चों के आचर-व्यवहार में कई तरह की खामियां पैदा कर देती हैं और इसी कारण बच्चा कभी  सामान्य  नहीं रह पाता।
बच्चों में इस तरह की कुंठाएं पैदा होने के कई तरह के पारिवारिक, सामाजिक व शारीरिक कारण हो सकते हैं।
इसीलिए अगर माता-पिता अपने बच्चों का सही शारीरिक व मानसिक विकास चाहते हैं तो उनमें ऐसी कुंठाएं कभी पैदा न होने दें।
उनके आचार-व्यवहार को निरंतर परखते रहें तथा जब भी बच्चा किसी कुंठा का शिकार दिखें तुरंत उपाय करें। अगर समस्या गंभीर लगे तो चिकित्सक की मदद भी ले सकते हैं।
5) कर्तव्य पालन या जिम्मेदारियों की आदत
अगर आप अपने बच्चों को भविष्य में कर्तव्यनिष्ठ और जिम्मेदार युवक-युवतियों  के रूप में देखना  चाहते हैं तो उनमें बचपन से ही ऐसी आदत डालें कि वे अपने कर्तव्यों या जिम्मेदारियों के प्रति सजगता से ध्यान देने लगें और धीरे-धीरे उन्हें निभाने के आदी बन जाएं।
बच्चों में ये गुण पैदा करने के लिए आप अपनी निगरानी या देखरेख में छोटी-छोटी जिम्मेदारियां उन पर डालना शुरू कर सकते हैं।
आप उन्हें बातचीत या बाल साहित्य के जरिए भी जिम्मेदारी या कर्तव्यपरायणता के महत्व का बोध कराने की कोशिश कर सकते हैं।

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