क्या भारत चीन की तरह 10000 रुपए में एक अच्छा स्मार्टफोन बना सकता है??

भारत के स्मार्टफोन भारत की मोबाइल कंपनी

नमस्कार मित्रो,

आज हम डिस्कस करेंगे ‘क्या भारत चीन की तरह 10,000 रूपये कीमत में एक अच्छा स्मार्टफोन बना सकता है?’

जुड़े रहिए हमारे साथ,

दोस्तों anti- china सेंटीमेंट हमारे देश में लगातार बन रहा है। चीनी सामानों का विरोध लगातार जारी है।

ऐसे में हमारे देश में चीनी ब्रांडो की स्थिति निश्चित रूप से हैरानी वाली है।

आइए जानते हैं।

चीनी ब्रांडो की स्थिति

1) ONEPLUS – ONEPLUS ने भारतीय बाजार में एक नॉर्ड स्मार्टफोन लॉन्च किया। जिसकी कीमत 28000-38000 के बीच है। इतनी कीमत होने के बावजूद इस कम्पनी का ये स्मार्टफोन भारत का बीते कुछ दिनों में सबसे ज्यादा सेलिंग प्रोडक्ट है। ये डाटा AMAZON , फ्लिपकार्ट जैसी ईकॉमर्स कम्पनियों द्वारा प्रदान की गई।

2) REALME – रियल मी भी भारतीय बाजार में 400 करोड़+ का बिजनेस भारतीय मार्केट में बीते कुछ दिनों में किया है।
लगातार इस कम्पनी के फोन भी आउट ऑफ स्टॉक हो रहे हैं।

3) XIOMI – XIOMI ने भी क्लेम किया कि उनके प्रोडक्ट सेकंड में आउट ऑफ स्टॉक हो रहा है। XIOMI का सबसे ज्यादा बिकने वाला प्रोडक्ट VIRED इयरफोन है।

भारत ने भी कसा है शिकंजा

भारत की सरकार लगातार चीनी कम्पनियों के सप्लाई को डिस्टर्ब कर रही है। चीन की कम्पनियां चीन से सारा माल मंगा कर भारत में असेंबल कर के इस पर मेड इन इंडिया का टैग लगा देती है।

लेकिन भारत ने इस बार इन कंपनियों के सप्लाई चैन को काफी डिस्टर्ब किया ताकि ये कंपनियां ये फोन, चीन में न बना कर भारत में बनाए।

इन कंपनियों ने भी माना है कि सप्लाई ISSUES की वजह से जितना BUSINESS भारत में होना चाहिए इतना हुआ नहीं!

क्या मोबाइल के क्षेत्र में भारत ‘आत्म निर्भर’ हो सकता है??

आइए इसकी भी चर्चा करते हैं दोस्तों। सबसे पहले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग पार्ट्स की बात करते हैं।

1) CHIP  प्रोडक्शन

दोस्तो आज कोई भी नॉर्मल स्मार्टफोन कम्पनियां 10-14 nano मीटर का चिप लगाती है।
चिप मोबाइल का brain होता है, मोबाइल की क्षमता चिप पर निर्भर करती है।

अगर एक्सपेंसिव मोबाइल फोन IPHONE 11 की बात करें। तो ये फोन 6 NANO मीटर का CHIPS लगाती है। जितना छोटा चिप्स रहता है उतना फोन गर्म, कम होता है। CHIP के मैन्युफैक्चरिंग में ताइवान और चीन पूरी दुनिया को लीड करता है।

अगर भारत की बात करें, तो 1975 में एक TEXAS INSTRUMENT नाम की कंपनी बैंगलोर में आई। लेकिन चिप के मैन्युफैक्चरिंग में कुछ भी खास नहीं कर पाई।

फाइनली ISRO अभी जो मेड इन इंडिया चिप्स बना रही है वो 180 नैनो मीटर की है जो कहीं से भी किसी भी स्मार्टफोन में लगाया नहीं जा सकता।

जब एप्पल जैसी कम्पनियां चीन पर निर्भर है तो भारत तो अभी इस मामले में बहुत ही ज्यादा पीछे है।

2) चिप का प्रोडक्शन काफी एक्सपेंसिव है।

भारत के पास इस क्षेत्र में कोई बड़ा commercial fab नहीं है, और ये काफी ज्यादा एक्सपेंसिव है।
आज के युग में कम्पनियां 3 नैनो मीटर चिप्स की तरफ देख रही है। आप सोच सकते हैं कि हमारा भारत इस मामले में कितना पीछे हो गया है।

3 nm चिप्स के प्रोसेस कॉस्ट की बात करें तो ताइवान की कम्पनी TSMC 20 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा निवेश कर चुका है।

अब आप सोचिए क्या भारत जैसा देश जिसका fiscal deficit , व्यापार घाटा इतना ज्यादा हो, क्या इतनी बड़ी रकम इन्वेस्ट कर पाएगा ?

COVID 19 की वजह से हमारा FISCAL डेफिसिट 84% उच्च दर पर चला गया है।

3) सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन

सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजशन की बात करें तो अभी किसी भी स्मार्टफोन में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम आता है।गूगलने अपना पहला एंड्रॉयड, स्टॉक एंड्रॉयड लॉन्च किया।

चीनी ब्रांड आज इतना मजबूती से स्मार्टफोन पर पकड़ बनाई की उन्होंने अपना ऑपरेटिंग सिस्टम डेवलप कर लिया। शाओमी की बात करें तो उसका MIUI ऑपरेटिंग सिस्टम है।

इस मामले में भारत शून्य के बराबर है।

कुल मिला कर बिना सरकार की अच्छी नीतियों, जब तक सरकार टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश नहीं करती।

मोबाइल के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनना भारत के लिए आसान नहीं होगा।

भारत के अच्छे और उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए। मैं आप सभी का धन्यवाद करना चाहूंगा।

आप इस विषय पर क्या सोचते हैं, ये कमेंट में जरूर बताएं।

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