नारी शक्ति

क्या मैं नारी शक्ति हूं

उड़ना चाहती हूं तो जाल में फंसा देते हैं

भागना चाहती हूं तो जंजीरों में बांध देते हैं

बोलना चाहती हूं तो होंठ सी देते हैं

कहीं अपना भविष्य देखना चाहती हूं, तो अंधेरे में धकेल देते हैं

क्या मैं नारी शक्ति हूं

मन की पीड़ा लिखना चाहती हूं, तो कलम तोड़ देते हैं

मैं अपने सौंदर्य को लेकर जाऊं, तो जाऊं कहां

घर और घर से बाहर

बेबस लाचार सी नजर आती हूं

क्या मैं नारी शक्ति हूं

मनाचेTalks हिंदी

इस कविता को हिंदी प्रेमियों में शेयर करें। औऱ मेरी कलम : मेरी पहचान में अपनी रचनाओं को प्रकाशित करने के लिए के लिए यहाँ क्लिक करे।

अपने दोस्तों में लेख शेअर करें मनाचेTalks हिन्दी आपके लिए ऐसी कई महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ लेके आ रहा है। हमसे जुड़ने के लिए हमारा फेसबुक पेज मनाचेTalks हिन्दी को लाइक करिए और हमसे व्हाट्स ऐप पे जुड़े रहने के लिए यहाँ क्लिक करे। टेलीग्राम चैनल जॉइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *