बच्चो में बचपन से संस्कार कैसे विकसित करें?

बच्चो में बचपन से संस्कार कैसे विकसित करें?

कहां जाता है बच्ची रोये तो उसे उपहार चाहे तो ना दीजिए कुछ देर बच्चे रोएंगे उपहार न पाने की वजह से थोड़ी देर बाद खुद ब खुद बच्चे शांत हो जाते हैं। लेकिन यदि उन्हें संस्कार नहीं दिया गया तो वह जीवन भर मां बाप को रुलाते हैं आसपास वाले को रुलाते हैं। संस्कार एक ऐसी चीज है जो बच्चों को मर्यादित रहना सिखाता है।

संस्कार यदि बच्चों को छोटे से नही में दिया जाएगा तो कभी भी कुछ भी कर सकते हैं। उनके अंदर किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता गलत काम करने से वह बिल्कुल नहीं घबराते है। बच्चों को संस्कार देने से घर के बाहर के लोगों पता चलता है कि वह कैसे घर से आते हैं।

उनके घर के माता-पिता कैसे हैं वह कैसे परिवेश में रहते हैं यदि अच्छे संस्कार बच्चों में रहेंगे तो लोग भी उन्हें अच्छा कहेंगे और आपकी ही प्रशंसा आपके ही बारे में अच्छी बातें करेंगे।

बहुत से बच्चे संस्कारित नहीं होते उन्हें बाहर के लोग बच्चों को कम लेकिन घर के गार्जियन को ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं। उनकी खराब हरकतों के लिए बच्चों को दोस् नहीं दिया जाता मां बाप को ही हमेशा दोस्ती माना जाता है कि तुम्हारे मां बाप ने ऐसे संस्कार दिए हैं जो तुम आज भी गंदे काम कर रहे हो यही संज्ञा दी जाती है।

इसलिए बच्चों को संस्कार देना जरूरी है क्योंकि समाज में इसका बहुत बड़ा फर्क पड़ता है खासकर यदि आपके बच्चे संस्कारित नहीं हैं। तो वह कभी भी अपने कैरियर में अच्छा कार्य करने के लिए प्रेरित नहीं रहेंगे।

बच्चों में संस्कार न मिलने का कारण

आजकल की भागदौड़ भरे जीवन में समय कम मिल पाता है बच्चों के पास बैठने का बच्चों से बातें करने का काम का बोझ इतना रहता है कि लोग अपने बच्चों से बात भी नहीं करते अपने काम में बिजी होने की वजह से बच्चों के लिए 2 मिनट का समय भी नहीं दे पाते।

आजकल के माता-पिता यही कारण है कि बच्चे गलत संगत का गलत चीजों का शिकार हो जाते हैं और वह आगे चलकर माता-पिता को ही परेशान करता हैं। बाद में माता-पिता के लिए कोई चारा नहीं बचता । कि अपने बच्चों की कोई चीज की अपेक्षा करले।

उनके बच्चे हैं उनके दुश्मन बन जाते हैं यदि समय पर बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाए बच्चों के लिए समय निकाला जाए बच्चों को संस्कार दिए जाएं तो कहीं भी ऐसी हालत नहीं आएगी। किसी की मां बाप के सामने उन्हें अपने बच्चों से ही दुख का सामना करना पड़ा यह वही बच्चे होते हैं।

दुख देने वाले जिनके माता-पिता को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने के लिए समय नहीं होता यही बच्चे बिगड़ कर बाद में अपने मां बाप को ही परेशान करते हैं

बच्चों को संस्कार देना क्यों जरूरी है

संस्कार देना बच्चे उतना ही जरूरी है जितना कि किसी ने सबको नन्हे वृक्ष को पौधे को पानी देना यदि हम नन्हे पौधे को पानी ना दे दो ना तो बड़ा होगा ना तो खुश होगा और ना ही हमें फल देगा। उसी प्रकार बच्चों को छोटे यही संस्कार नहीं देंगे तो वह तो हमारी कभी इज्जत करेगा ना दूसरों की इज्जत करेगा ना कभी वह अपने कैरियर में कुछ कर पाएगा।

गलत संगत का शिकार ओके वह भी गलत चीजें करने लगेगा उपहार के बिना तो बच्चा रह सकता है किंतु सरकार के बिना हर बच्चा अधूरा ही माना जाएगा आपका नाम हर जगह खराब करेगा रिश्तेदार हो चाहे आप के आस पास वाले लोग भी आपके बच्चों में संस्कार नहीं तो आपके पास शिकायत आती हैं स्कूल से शिकायतें आएंगी क्योंकि पहले गुरु मां-बाप होते हैं।

यदि संस्कार मां बाप संस्कार नहीं दे पाएंगे तो बच्चों को कोई दूसरा व्यक्ति संस्कार नहीं दे पाएगा चाहे वह घर का हो चाहे स्कूल का चाहे रिश्तेदारों या आसपास के लोग ये आपके बच्चों को अच्छी बाते नही शीखाने आएंगे

मां-बाप के संस्कार मां बाप जो जो कुछ करते हैं बच्चों पर उसका असर ज्यादा पड़ता है। घर में बच्चे वही देखकर सीखते हैं।

कैसे बच्चों में बचपन से ही संस्कार विकसित करें How to develop moral ethics in Kids

  • बच्चों में संस्कार साबित करना बेहद जरूरी होता है हर मां-बाप की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें।
  • क्योंकि जिससे कि बच्चे भविष्य में खुद की जिम्मेदारी ले पाए और आगे बढ़ाएं मां-बाप के संस्कार ही बच्चों को प्रेरित करते हैं आगे बढ़ने के लिए मां-बाप के संस्कार से ही बच्चों में अच्छी सोच स्थापित होती है।
  • बच्चों को छोटे से संस्कार नहीं दिया गया तो बड़े होकर उन्हें आप चाह कर भी संस्कार में नहीं डाल सकते। कहा जाता है।
  • मिट्टी के बर्तन को कुम्हार तभी तक सुधरता है ठोंक पीट कर बर्तन बराबर करता है जब तक बर्तन कच्चा रहता है।
  • मिट्टी के बर्तन को पकाने के बाद उसमें किसी तब्दीली की गुंजाइश नही रहती एक बार बर्तन टेढ़े मेढ़े भी बन गए तो कुम्हार उसे ठीक नही कर सकता क्योंकि ठोकने पीटने से बर्तन टूट जाएगा ।

मां बाप को बदलना पड़ेगा

  • मां बाप की जिम्मेदारी है बच्चों अच्छे संस्कार मैंने तो आपको अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव लाना पड़ेगा अभी तरफ से बच्चों को कोई प्रभाव ना पड़े।
  • आपको अपने खाने-पीने में बैठने में सोने जागने में बदलाव करना पड़ेगा आपको अपने खाने पीने में अपने बैठने में सोने जागने में बदलाव करना पड़ेगा।
  • बच्चों को तो क्या चीज बड़ी कर बेकार करने से अच्छा है बार-बार टोकके बच्चों को ढीठ करने की आदत न बनाये। आप अपने काम से अपने ऊपर परिवर्तन लाकर जैसा आप चाहते हैं।
  • जैसे बच्चों को बनाना चाहते हैं वैसे गतिविधियां आपको स्वयं अपनानी पड़ेगी आपको सुबह शाम समय का विशेष ध्यान देना होगा।
  • खाने-पीने का समय बनाना होगा
  • सुबह जल्दी उठना शाम को जल्दी सोना समय से खाना खाना यदि टीवी देख रहे हैं बच्चे टीवी को भी देखना है। यदि आप समय का ध्यान देंगें तो वह भी समय से ही देखेंगे । पहले शुरुआत आपको करनी पड़ेगी आप टीवी देर तक देखेंगे तो बच्चे भी आपकी ही नकल करेंगे।
  • और आप गैर हाजरी में वह सारे काम करेंगे जिस काम के लिए आप ने उन्हें मना किया है बच्चों की फितरत होती है। बच्चे की आदत होती है ।
  • उनको जिस काम के लिए मना करते हैं वह वही काम करते हैं इसलिए आपको अपने तरीकों में खुद पर बदलाव लाना बहुत जरूरी जिसे देखकर बच्चे गलत काम करने से बचें।
  • जो वह देखेंगे वही करेंगे आपने अच्छे संस्कार देने के लिए सबसे जरूरी काम यही करिए।
  • यदि यह संस्कार छोटे पन ही मिलना शुरू हो जाए तो बच्चे अच्छे काम करने के आदी हो जाते हैं उन्हें चाह कर भी कोई गलत शिक्षा नहीं दे सकता और ना ही उन्हें गलत संगत में ला सकता है।
  • छोटे पन में संस्कार अच्छे संस्कार देना मां-बाप की जिम्मेदारी होती है क्योंकि शुरुआत में कोई ऐसा अध्यापक नहीं होता जो बच्चों को समय दे पाए और बच्चों के पास रह पाए मां बाप ही ऐसे दो जिम्मेदार लोग होते हैं जो बच्चे की शुरुआती समय में उनके साथ रहते हैं।

बच्चों के इंटरेस्ट को बढ़ावा दें

  • हर मां बाप बाप की अपने बच्चों से अपेक्षा रहती है कि वह बड़े होकर कुछ बने उनका नाम रोशन करें लेकिन ज्यादातर मां-बाप इस सुख से वंचित रह जाते हैं।
  • ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह अपने बच्चों में शुरू से ही उनके इंटरेस्ट को नहीं पहचानते और ना ही उनकी इंटरेस्ट को बढ़ावा देते बच्चों पर अपने शौक तथा दूसरों के बच्चों को देख का अपने बच्चे को आगे बढ़ाना चाहते हैं ।
  • पड़ोसी का बच्चा क्या कर रहा है अच्छा कर रहा है तो उसी की नकल करवाते हैं।
  • ऐसे में ही बच्चे काफी करने के चक्कर में कुछ नहीं कर पाते यदि हर मां बाप बच्चों में उनके इंटरेस्ट को ढूंढने उनका उनके बच्चे में किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा पकड़ है किस में उनका इंटरेस्ट है।
  • किस चीज को वह खुशी-खुशी खेल-खेल में कर डालते हैं वह चीज ढूंढना चाहिए हर बच्चा पढ़ने में ठीक नहीं हो सकता हर बच्चा खेलने में ठीक नहीं हो सकता बच्चे के हिसाब से बच्चे के इंटरेस्ट के हिसाब से उसे बढ़ावा देंगे
  • तो वह तरक्की के 2 गुना चांसेस के साथ आगे बढ़ेगा और पूरा भरोसा होता है कि बच्चे अपने इंटरेस्ट को जल्दी कामयाब हो पाएंगे।
    मजबूरियों का बहाना न दे

माना कि आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में समय बहुत कीमती है काम से ही लोगों को फुर्सत नहीं मिलती काम की व्यस्तता के चलते ही दूसरों को समय निकालना बहुत मुश्किल होता है।

आजकल के समय में लेकिन यदि आप अपने बच्चों के लिए समय नहीं करेंगे बच्चे चलाते समय नहीं देंगे यही बच्चे आपको दुख देने का काम करेंगे आपके दुख का कारण भी यही बच्चे बनेंगे इसलिए आपको

धन्यवाद

निष्कर्ष

मुझे उम्मीद है कि आपको यह आर्टिकल बच्चों में बचपन से संस्कार कैसे विकसित करें को पढ़कर आर्टिकल में दी गई जानकारियां अच्छी लगी होंगी यदि आपको यार जानकारियां पसंद आई है। तो आपको भी अपने बच्चों पर अप्लाई करना चाहिए अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए छोटे पन से ही उनको संस्कार देना बहुत आवश्यक है संस्कार से ही उनके जीवन में अच्छी वृद्धि होना है।

उन्हें किसी भी स्थिति में लड़ने की शिक्षा आपसे ही मिलेगी काम से बिजनेस से यदि आप समय बच्चों के लिए नहीं देंगे तो वह पर आपको भी समय नहीं देंगे आपको भी बच्चों के दुख का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि आज आप अपने बिजनेस के चलते समय नहीं दे रहे हैं जिससे वह अशिक्षित तथा और संस्कारित होंगे और गलत संगत में जाएंगे।

इसलिए बच्चों में संस्कार विकसित करना बचपन में ही जरूरी है।

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धन्यवाद

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