Author: डॉ. प्रशान्त कुमार मिश्र (प्रीत)

बेबस पिताबेबस पिता

पिता पहन रहे थे कपड़े, बेटा बहुत व्याकुल था, साथ में मेला जाने हेतु, सच में वो आकुल था। सपनों ...

hindi-kavita

बिधवा बूढ़ी औरत की व्यथाबिधवा बूढ़ी औरत की व्यथा

तेरे जानें के बाद अब कुछ भी अच्छा नही लगता, ये महल, आँगन, दरवाजा सच्चा नही लगता। जिसे तुम बोल ...