अगर हैं तनाव से परेशान और चाहते हैं खुश रहना, तो पढ़िए कुछ खास टिप्स

अगर हैं तनाव से परेशान और चाहते हैं खुश रहना, तो पढ़िए कुछ खास टिप्स

आजकल ऐसे बहुत सारे लोगों को यह कहते देखा-सुना जाता है कि अंदर ही अंदर हमेशा कुछ तनाव सा बना रहता है और तनाव के कारण किसी भी काम में मन नहीं लगता।

खान -पानमें भी पहले की तरह कोई खास दिलचस्पी नहीं रही है।

सेहत बनाने पर पूरा ध्यान देने की कोशिश करता हूं मगर फिर भी उतना सेहतमंद नहीं हूं, जितना कि प्रयास करता हूं।

आखिर क्या करूं और क्या न करूं? इस तनाव से मुक्ति कैसे मिले?

इस तनाव से मुक्ति पाना उतना भी मुश्किल नहीं है जितना की आप समझते हैं।

अगर आप थोड़ा गंभीर होकर कोशिश करें तो इस समस्या का समाधान आसानी से कर सकते हैं।

आइए जानें कैसे-

1) अपने अंदर के तनाव को समझिए

सबसे पहले आपको अपने अंदर के तनाव के कारण को समझना चाहिए।

कि आखिर आपके मन-मस्तिष्क में तनाव पनपता क्यों है?

खास तौर से अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का गहनता से विश्लेषण कीजिए।

और जानिए कि कहीं आपके तनाव का कारण आपकी कोई शारीरिक या मानसिक बीमारी तो नहीं है।

क्योंकि कई बार किसी बीमारी के कारण भी व्यक्ति अक्सर तनाव का शिकार बन जाता है।

ऐसे व्यक्ति को लगता जरूर है कि, उसके पास तनाव पैदा करने वाला कोई कारण नहीं है, मगर उसके पास तनाव का खास कारण होता है जिसे वह समझ नहीं पाता।

या फिर समझते हुए भी उसकी अनदेखी करता रहता है।

इसी वज़ह से तनाव में रहता है व काम में बराबर मन नहीं लगता।

तथा साथ ही मन बुझा -बुझा -सा भी रहता है अर्थात् खुलकर हंसने -मुस्कराने को मन नहीं करता।

ऐसी स्थिति में आपको अपनी शारीरिक या मानसिक बीमारी का इलाज किसी चिकित्सक से बिना समय गंवाए और बिना झिझके कराना चाहिए ताकि भविष्य में तनाव रहित मुस्कान भरा जीवन जिया जा सके।

2 ) मनोविकृतियों का शमन करना

कभी-कभी आदमी के भीतर ऐसी कुंठाएं या मनोविकृतियां पनप जाती हैं जो उसे सामान्य -सी लगती हैं मगर होती सामान्य बिलकुल भी नहीं
हैं।

ऐसी कुछ मानसिक विकृतियां या कुंठाएं हैं -ईर्ष्या, भय, क्रोध, हीनता, संकोच, अधैर्य आदि भावनाएं।

ये सभी दिखती तो बहुत मामूली हैं मगर आदमी के भीतर घर कर लें तो गंभीर तनाव का कारण बन सकती हैं, और उसे मानसिक रूप से कमजोर बना सकती हैं।

इसलिए इन मानसिक कुंठाओं से खुद का बचाव करना बहुत ही जरूरी है।

तनाव पैदा करने वाली इन कुभावनाओं का शमन जितने प्रभावशाली ढंग से हम स्वयं कर सकते हैं, कोई भी डाक्टर, वैद्य या चिकित्सक कभी नहीं कर सकता।

इनसे छुटकारा पाने के लिए सबसे अच्छा उपाय है आत्म नियंत्रण यानी हमें स्वयं पर कंट्रोल करना सीखना चाहिए।

जरा-सी स्थिति बिगड़ने या जरा-सी बात खराब होने पर भावुक या परेशान होकर धैर्य कभी नहीं खोना चाहिए।

मन में हमेशा यह दृढ़ संकल्प रखना चाहिए कि -“मैं कैसी भी परिस्थितियां हों उनका सामना पूरे साहस व धैर्य से करूंगा।

कभी खुद को हीन नहीं समझूंगा और हमेशा सामने वाले से बेहतर पेश आते हुए सामान्य जीवन जीने का प्रयास करूंगा।”

अगर इस संकल्प को सोते -जागते और दिन में जब भी समय मिले बार-बार दोहराते रहोगे तो निश्चय ही मन कुंठाओं से मुक्त होगा और हंसी -खुशी से जीने का आनंद उठाने के काबिल बन सकोगे।

3) सकारात्मक सोच की शक्ति प्राप्त करना

नकारात्मक सोच आदमी की शारीरिक व मानसिक कमजोरी का कारण बनती है और सकारात्मक सोच उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।

इस बात से तो शायद हम में से हर कोई वाकिफ़ है।

वे लोग जो खुद को हमेशा सकारात्मक रखते हैं अथवा सकारात्मक सोचने के आदी होते हैं शायद ही कभी तनावग्रस्त हो पाते हैं और कभी होते भी हैं तो मात्र कुछ देर किए क्योंकि उनके भीतर पनपने वाला तनाव उनकी सकारात्मक सोच के कारण स्वतः ही रफू चक्कर हो जाता है।

इसके विपरीत जिनमें नकारात्मक सोचने की बुरी आदत होती है उनसे तनाव का अटूट संबंध बना रहता है।

अपनी नकारात्मक सोच के कारण वे बार -बार तनाव का शिकार बनते रहते हैं और उनका मन -मस्तिष्क तनाव का स्थायी घर बन जाता है।

इसलिए खुद को हमेशा सकारात्मक रखने का प्रयास कीजिए ताकि तनाव से दूर रहकर मन खुश रहे और काम में लगे।

अपनी सोच को सकारात्मक बनाने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है अपने शरीर को मजबूत बनाने के साथ -साथ मन की मजबूती का भी ध्यान रखना।

शरीर व मन दोनों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम, योगा, ध्यान-मनन आदि करना।

प्रेरक व उच्च कोटि का साहित्य भी हमारी सोच को सकारात्मक बनाने में योग दे सकता है। अपने व्यक्तिगत अभ्यास से भी आप खुद इसका आदी बना सकते हैं।

4) शरीर के ही नहीं मन को भी दो पूरा आराम

शरीर थक जाता है तो हम कोई काम करने की स्थिति में नहीं रहते और हमें आराम करना पड़ता है।

हम आराम करने के बाद फिर से खुद को काम करने में समर्थ पाते हैं।

हालांकि जब हम शरीर को आराम देते हैं तो हमारा मन भी आराम पाता है।

मगर फिर भी अगर हम मन के आराम या शांति एवं स्फूर्ति हेतु कुछ खास उपाय करें तो तनाव रहित होकर खुशी और मस्ती में जीवन जीने का अनूठा ही आनंद पा सकते हैं।

हम अपने मन को आराम या विश्राम देने के लिए कई तरह की युक्तियां अपना सकते हैं, जैसे कि ध्यान करना या मन को शिथिल -शांत करने वाले अन्य योगासन करना, दिमाग वाले खेल खेलना, अपनी मनपसंद किताबें पढ़ना, प्रातः काल भ्रमण करना, अपने लिए कोई ऐसी प्रार्थना या मंत्र चयनित करना जो सोते -जागते समय आप ईश्वर में ध्यान लगा कर दोहरा सकें ताकि मन को आराम या शांति मिले।

मन की शांति के लिए एकांत में अपना मनपसंद संगीत सुनना भी अच्छा रहता है।

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