इन्सोम्निया । अनिद्रा के बारे में पूरी जानकारी और अच्छी नींद पाने के उपाय

अनिद्रा के लिए आयुर्वेदिक दवा

इनसोम्निया को सरल भाषा में समझे तो यह अनिद्रा या नींद ना आने की समस्या है। आज इस समस्या से दुनिया में लाखों लोग पीड़ित है।

इनसोम्निया या अनिद्रा एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण व्यक्ति चैन की नींद नहीं सो पाता या अगर सोने के बाद एक बार आंख खुल जाए तो फिर दोबारा गहरी नींद नहीं आती। यह समस्या आज बहुत ही सामान्य समस्या है जिससे हर दूसरा व्यक्ति लड़ रहा है।

इनसोम्निया या अनिद्रा एक ऐसा डिसऑर्डर है जो आपकी एनर्जी लेवल, स्वास्थ्य, मूड, कार्य क्षमता सभी को प्रभावित करती है। व्यक्ति सारा दिन थका थका सा महसूस करता है और उसका किसी कार्य में मन नहीं लगता।

सामान्य सी लगने वाली यह समस्या आज सबके लिए एक बड़ा चिंताजनक विषय है।

इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति दिन और रात दोनों ही समय में परेशान रहता है। रात को नींद ना आने के कारण दिन के समय व्यक्ति को सुस्ती, नींद या थकावट से परेशानी रहती है।

आराम सभी के लिए बहुत जरूरी है। 6 से 7 घंटे की गहरी नींद एक स्वस्थ शरीर व शांत मन के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति रात को चैन से नहीं सो पाता है तो वह सारा दिन अपना कार्य सुचारू रूप से कर पाता है।

आज इस बीमारी का शिकार हर वर्ग के लोग है। वयस्क से लेकर बच्चों तक, बड़े- बुजुर्गों से लेकर नौजवानों तक हर कोई इसका सामना कर रहा है।

इनसोम्निया या अनिद्रा के कारण

1. तनाव – जो आजकल हर परेशानी, हर बीमारी की जड़ है।

2. इलेक्ट्रिक गैजेटस जैसे स्मार्टफोन, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी का अत्यधिक प्रयोग।

3. साइकियाट्रिक डिसऑर्डर्स (किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त होना)।

4. किसी शारीरिक रोग से पीड़ित होना जैसे बी.पी., शुगर, हार्ट प्रॉब्लम आदि।

5. अत्यधिक स्टेरॉयड का सेवन करना।

6. किसी कार्य को लेकर अधिक चिंतित रहना।

7. शरीर में विटामिन B12 की कमी होना

8. अत्याधिक कैफीन का सेवन।

9. दोपहर या शाम के वक्त अधिक सोना।

10. गर्भावस्था के दौरान भी कई बार महिलाओं को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।

11. स्लीप साइकिल (Sleep Cycle) में बार-बार बदलाव होना।

इनसोम्निया या अनिद्रा के लक्षण/ दुष्प्रभाव

1. डिप्रेशन या एंजाइटी।

2. लो एनर्जी लेवल (Low Energy Level)।

3. मूड में बदलाव (Mood Swings)।

4. रात को चैन से ना सो पाना।

5. सुबह जल्दी उठना।

6. याददाश्त कमजोर होना।

7. थकान, चिड़चिड़ापन या कमजोरी महसूस होना।

8. नींद पूरी ना होना।

9. सोते वक्त बार-बार उठना।

इनसोम्निया या अनिद्रा से बचाव के उपाय

1. जीवन शैली में बदलाव। पुरानी कहावत – “Early To Bed and Early To Rise” को अपनाना।

2. सोने से 2 घंटे पहले भोजन करना ताकि गैस या अपच की समस्या से बचा जा सके।

3. सोने से एक घंटा पहले इलेक्ट्रिक गैजेटस से दूरी बनाना ताकि आपका दिमाग शांत रह सके।

4. भोजन के बाद हल्की-फुल्की सैर करना। एक कहावत है – भोजन के बाद हजार कदम, रखे सदा सेहतमंद।

5. दवाइयों का अत्यधिक सेवन ना करना।

6. धूम्रपान या शराब का सेवन न करना।

7. अगर कोई मानसिक परेशानी है तो साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना।

8. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT-cognitive-behavioral therapy) करवाना, ताकि तनाव या चिंता से दूर रहा जा सके।

9. शयनकक्ष (सोने वाला कमरा) में अत्यधिक रोशनी या गंदगी का ना होना।

10. जिस समय नींद आए, उसी समय सो जाना।

11. नियमित योग और व्यायाम करना।

इनसोम्निया के प्रकार

इनसोम्निया मुख्य रूप से दो प्रकार का पाया जाता है।

1. एक्यूट इनसोम्निया (Acute Insomnia)

2. क्रॉनिक इनसोम्निया ( Chronic Insomnia)

आइए इन्हें थोड़ा विस्तार में समझे -:

एक्यूट इनसोम्निया (Acute Insomnia) – यह एक सामान्य प्रकार का इनसोम्निया या अनिद्रा की समस्या है। यह समस्या थोड़े समय जैसे केवल कुछ दिनों या हफ्तों के लिए होती है।

यह मुख्यतः सामान्य कारणों जैसे कोई पारिवारिक परेशानी, कोई आर्थिक परेशानी, कोई घटना या कोई दबाव की वजह से हो सकती है। जैसे ही परेशानी खत्म होती है वैसे ही समस्या भी अपने आप खत्म हो जाती है।

क्रॉनिक इनसोम्निया (Chronic Insomnia) – यह इनसोम्निया या अनिद्रा की बीमारी का एक गंभीर रूप है। यह बीमारी लंबे समय तक के लिए रहती है जैसे कुछ महीने या उससे भी ज्यादा।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार क्रॉनिक इनसोम्निया बीमारी एक सेकेंडरी रूप है मतलब यह किसी अन्य बीमारी के साइड इफेक्ट या शरीर पर दुष्प्रभाव का नतीजा होती है।

इसके मुख्य कारण कोई चिकित्सा स्थिति (Medical Condition) या लंबे समय तक चली दवाइयां या कैफ़ीन, तंबाकू, शराब जैसे पदार्थों का अधिक सेवन हो सकता है।

हमने इनसोम्निया के कारण और दुष्प्रभाव दोनों को जाना।

इनसोम्निया का कारण और इलाज 50% तनाव से ही जुड़ा हुआ है। चिंता चिता समान है और खुशियां स्वस्थता की पहचान है।

दोनों ही हमारे बस में नहीं है। हम खुश रहने के लिए और परेशानियों को दूर रखने के लिए केवल प्रयास कर सकते है।

तो अब यह हमारे हाथ में है हमें अपने लिए क्या चुनना है? हमारी माने तो खुश रह कर देखें। आपकी मुस्कान ना केवल आपकी बल्कि दूसरों की भी परेशानी को दूर कर देगी।

अच्छी आदतें अपनाइए और बीमारियों को दूर भगाइए। और यदि आप लगातार इस समस्या से जूझ रहे है या सामान्य प्रयासों के बाद भी इस समस्या में कोई सुधार नहीं हो रहा है तो न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह लें।

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